राम-लखन-सा मन हो -डॉ.विवेक कुमार

मिटे अँधेरा अन्तर्मन का शुभ्र-प्रकाश हो जीवन में, सुख समृद्धि और शांति रहे हमेशा आँगन में। ज्ञान-विवेक-प्रकाश से हरा-भरा जन-मन हो,मिटे बुराई-ईर्ष्या-नफरत राम-लखन-सा मन हो। सपने सबके सब सच होंअधरों पर हों हर्ष गान,करे तरक्की देश हमाराजग में हो उसका मान।सरहद पर सरगम का सुर हों आपस में हो भाईचारा। मान बढ़े मानवता का अधरों पर जयगान हमारा। काम करें ऐसा जग में साथ हमेशा नारायण हों,अबकी ऐसा दीप जलाएँपुलकित सबके तन-मन हों।डॉ. विवेक कुमारतेली पाड़ा मार्ग, दुमका-814 101(c) सर्वाधिकार सुरक्षित।

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15 Comments

  1. babucm 02/11/2016
  2. Markand Dave 02/11/2016
  3. डॉ. विवेक 02/11/2016
  4. डॉ. विवेक 02/11/2016
  5. Shishir "Madhukar" 02/11/2016
  6. mani 02/11/2016
  7. डॉ. विवेक 02/11/2016
  8. डॉ. विवेक 02/11/2016
  9. Anu Maheshwari 02/11/2016
  10. निवातियाँ डी. के. 02/11/2016
  11. डॉ. विवेक 02/11/2016
  12. Dr Swati Gupta 02/11/2016
  13. डॉ. विवेक 02/11/2016
  14. MANOJ KUMAR 02/11/2016
  15. डॉ. विवेक 03/11/2016

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