४२. खाबों में तुम हो……….|गीत| “मनोज कुमार”

खाबों में तुम हो जवाबों में तुम हो ख्यालों में तुम हो सवालों में तुम हो जब भी मैं देखूँ बहारों में तुम होखाबों में तुम हो…………………………………………..मिट जाते है शिकवे जब बाँहों में आते हो बढ़ जाती है बेताबी जब दूर जाते होकिताबों में तुम हो नकाबों में तुम हो गुलाबों में तुम हो शराबों में तुम होखाबों में तुम हो…………………………………………..कैसे हम गवाँ दें सबसे सुन्दर जो तुम हो घबराते हैं हम भी जब तुम पास आते हो संगीत में तुम हो मेरी धड़कन में तुम होलहरों में तुम हो मेरी आँखों में तुम हो खाबों में तुम हो…………………………………………..तेरी गेसू की छाया में मन करता है सो जाऊँकरता हूँ इंतजार सदा ऐसा ही बस हो जाये रिश्तों में तुम हो मेरी खुशियों में तुम होअरमानों में तुम हो मेरी चाहत में तुम होखाबों में तुम हो…………………………………………..“मनोज कुमार”

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14 Comments

  1. babucm 02/11/2016
    • MANOJ KUMAR 02/11/2016
  2. Markand Dave 02/11/2016
    • MANOJ KUMAR 02/11/2016
  3. Shishir "Madhukar" 02/11/2016
    • MANOJ KUMAR 02/11/2016
  4. डॉ. विवेक 02/11/2016
    • MANOJ KUMAR 02/11/2016
  5. mani 02/11/2016
    • MANOJ KUMAR 02/11/2016
  6. निवातियाँ डी. के. 02/11/2016
    • MANOJ KUMAR 02/11/2016
  7. vinod kumar dave 03/11/2016
    • MANOJ KUMAR 04/11/2016

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