ग़ज़ल के लिए….सी. एम्. शर्मा (बब्बू)..

जबसे मिले हो मुझको धड़कनें बन गये हो तुम…मेरी चैन ओ चाहतों में उर्वशी बन आते हो तुम….तस्वीर से निकल के ज़िन्दगी बन गये हो तुम…हाथों की लकीरों में तकदीर बन गये हो तुम…मेरी ज़िन्दगी थी बंजर इक बेसबब कहानी….है प्यार का अब गुलशन जब से मिले हो तुम…..तेरे हुस्न के सरूर से मौसम में है नशा सा…नैनों से पिलाके मुझे मदहोश कर गये हो तुम…दिल मेरा चहक रहा तेरी धड़कन सुन रहा है…खुशबू बन के साँसों में महक रहे हो तुम…ये क्या हो रहा है मुझे लगता मैं नहीं हूँ…देखूँ जब भी खुदको नज़र आते हो तुम…दिन रात तुम मेरे हो हर पल मेरे हो तुम…..सरगोशी साँसों की में रोम रोम सुनते हो तुम…थी ये बेसुरी कलम भी मेरे दिल की तरह खाली….आये हो जब से तुम ग़ज़ल बन गये हो तुम….”चन्दर” भी चमक रहा मोहब्बत तेरी का असर….मेरा वजूद तुम से है आफ़ताब मेरे हो तुम….\/सी. एम्. शर्मा (बब्बू)सरगोशी = फुसफुसाहटआफ़ताब = सूरज

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20 Comments

  1. निवातियाँ डी. के. 31/10/2016
    • babucm 31/10/2016
    • babucm 01/11/2016
  2. mani 31/10/2016
    • babucm 01/11/2016
  3. Shishir "Madhukar" 31/10/2016
    • babucm 01/11/2016
  4. Riyaz Tanveer Sheikh 31/10/2016
    • babucm 01/11/2016
  5. डॉ. विवेक 31/10/2016
    • babucm 01/11/2016
  6. Dr Swati Gupta 31/10/2016
    • babucm 01/11/2016
  7. MANOJ KUMAR 02/11/2016
    • babucm 02/11/2016
  8. Meena Bhardwaj 02/11/2016
    • babucm 02/11/2016
  9. ANU MAHESHWARI 02/11/2016
    • babucm 03/11/2016

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