गोवर्धन पूजा

दीवाली के अगले दिन,आता है गोवर्धन का त्यौहार।बात है ये सदियों पुरानी,वर्षा के देव इंद्र थे अभिमानी,समय पर बर्षा हो इस डर से,इंद्र की पूजा करते थेगोकुल का हर एक प्राणी।जब देखा कृष्ण ने ये सब,उन्होंने एक युक्ति लगायी,समझाया उन्होंने गोकुलवासियों को,डरो न तुम इंद्रदेव से,वर्षा करना तो उनका काम है,सब करों गोवर्धन की पूजा,क्योंकि इनसे मिलता हमको अनाज है,सहमत हुए सब इस बात से,और गोवर्धन की पूजा की करी तैयारी,देखकर ये सब इंद्र जी क्रोधित हुए तब,और वर्षा घनघोर कर डाली,घमासान बारिश से गोकुलवासी घबराये।तब रक्षा उनकी करने के लिए,अंगुली पर कृष्ण ने गोवर्धन पर्वत उठाये।गोकुलवासी गोवर्धन की शरण में आये।अभिमान चूर हुआ इंद्र का तब,कृष्णा के समक्ष वो आये।छमा याचना की अपने कृत्य की,सबके साथ फिर मिलजुलकर,गोवर्धन पर्वत की पूजा में आये।उसी दिन से मनाया जाने लगा,ये गोवर्धन का त्यौहार,गोवर्धन की पूजा जो भी करता,पाता है वो कृष्ण का प्यार।”By: Dr.Swati Gupta

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12 Comments

  1. C.M. Sharma babucm 31/10/2016
    • Dr Swati Gupta Dr Swati Gupta 31/10/2016
  2. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 31/10/2016
    • Dr Swati Gupta Dr Swati Gupta 31/10/2016
    • Dr Swati Gupta Dr Swati Gupta 31/10/2016
  3. mani mani 31/10/2016
    • Dr Swati Gupta Dr Swati Gupta 31/10/2016
  4. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 31/10/2016
    • Dr Swati Gupta Dr Swati Gupta 31/10/2016
  5. डॉ. विवेक डॉ. विवेक 31/10/2016
    • Dr Swati Gupta Dr Swati Gupta 31/10/2016

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