“हिंदुस्तानी दिए”

? हिंदुस्तानी दिए ? क्यों न कुम्हार के दो दिन को खुशमय बनाते है,आइये अब हम सभी मिलकर हिंदुस्तानी दिए जलाते हैं।कुम्हार बड़े ही प्रेम से अपने हाँथो से दिए बनाते है,आइये अब हम सभी मिलकर हिंदुस्तानी दिए जलाते हैं।प्रेम से कुम्हार के हाँथो के बने दिए को हम अपने गले से लगाते हैं,आइये अब हम सभी मिलकर हिंदुस्तानी दिए जलाते हैं।उन प्रेम के दिए से हम अपने घर में बने आँगन को सजाते है,आइये अब हम सभी मिलकर हिंदुस्तानी दिए जलाते हैं।अपने हाँथो में है तो फिर क्यों न कुम्हार के बच्चों को हंसाते हैं,आइये अब हम सभी मिलकर हिंदुस्तानी दिए जलाते हैं।”सत्यम श्रीवास्तव” की इस बात को हम सभी दूर-दूर तक पंहुचाते है,आइये अब हम सभी मिलकर हिंदुस्तानी दिए जलाते हैं। युवा कवि “सत्यम श्रीवास्तव” नैनी, इलाहाबाद। ✍?कृपया अधिक से अधिक शेयर करे। ?

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2 Comments

  1. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 29/10/2016

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