जीवन के पथ पर

जीवन के पथ पर चलते गएआ मोड़ पर फिर देख रहे है तुम्हे ।डोली में बैठकर जा रही होतुम किसी और के द्वारमन प्रसन्न आँख नम हैधन है वहाँ जो चाहे खरीदलोयहाँ प्यार है किसी धन से न खरीद पाओ ॥सपना जो संग घर बसना था अपनापन्ना बन गया यादो की किताबो मेंपंछी थे एक डाल के उड़ गई तुमछोड़ मुज़े वीराने में ।।बस इस मोड़ के बादतुम्हे नहीं देख पाउँगा ।नई सड़क परआशियाना बनाने चल चला जाऊंगा ||अमर 

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3 Comments

  1. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 28/10/2016
  2. C.M. Sharma babucm 28/10/2016

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