सूनापन

कौन सी यह नयी भावना, मन में पाँव पसारे रे |अनकही सी अनछुई सी, जग क्या इसको पुकारे रे |मन का कोई कांच टूटा, आँखें सुनामी लाये रे |कैसा सूनापन नया ये, कोई ज़रा बतलाये रे |एकाकीपन सबको सताता, थे बहुत किस्से सुने |हमने तो वीराने में भी, तेरे ही बस सपने चुने |याद तो अब भी है दिल में, इसमें मगर वो बात नहीं |चाँद में भी दाग दिखते, जब तू मेरे साथ नहीं |

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8 Comments

  1. Dr Swati Gupta Dr Swati Gupta 28/10/2016
    • विवेक गुप्ता 02/11/2016
  2. C.M. Sharma babucm 28/10/2016
    • विवेक गुप्ता 02/11/2016
  3. Kajalsoni 28/10/2016
    • विवेक गुप्ता 02/11/2016
    • विवेक गुप्ता 02/11/2016

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