अनूठी दिवाली —“अमन का चिराग” —डी के निवातियाँ

अनूठी दिवाली —“अमन का चिराग”

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अपनी माटी का कण – कण संजोकरविविध रूपों में जिसने दीपक सजायेनमन धरा के उस मूल वास्तुकार कोप्रथम दीप उसे समर्पित करके जलाये !आओ मिलकर सब करे प्रण, क्यों न इस बार अनूठी दिवाली मनाये ।।

अगर किसी घर तुम्हे दिखे अँधेराजाकर देखो किस आफत ने है घेराहाथ बढाकर दिल से करो मददउसके घर को भी रोशन कर आये !आओ मिलकर सब करे प्रण, क्यों न इस बार अनूठी दिवाली मनाये ।।

खोजे अपने इर्द-गिर्द सैनिक का घरआये न लौटकर अभी डटे सीमा परमात पिता और घरवाले बैठे रूखे मनउनके संग हँसी-ख़ुशी कुछ पल बिताये !आओ मिलकर सब करे प्रण, क्यों न इस बार अनूठी दिवाली मनाये ।।

साइबर से मिट रही आपसी नज़दीकियाँप्रगति संग बढ़ी है अपने रिश्तो में दूरियाँबच्चो बूढो के बीच घटते इस तालमेल कोसंयुक्त रूप में परिवार संग वक़्त बिताये !आओ मिलकर सब करे प्रण, क्यों न इस बार अनूठी दिवाली मनाये ।।

सैकड़ो हजारो के फूँकते बम पटाखेअपने ही हाथो हम प्रदुषण फैलातेमिटाकर ये गन्दी रीत प्रेम सन्देश फैलाये,एक दूजे से कर आदान-प्रदान, “अमन का चिराग” जलाये !आओ मिलकर सब करे प्रण, क्यों न इस बार अनूठी दिवाली मनाये ।।

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स्वरचित :- डी के निवातिया

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24 Comments

  1. Chandra 27/10/2016
    • निवातियाँ डी. के. 31/10/2016
  2. babucm 27/10/2016
    • निवातियाँ डी. के. 31/10/2016
  3. Shishir "Madhukar" 27/10/2016
    • निवातियाँ डी. के. 31/10/2016
  4. Meena Bhardwaj 27/10/2016
    • निवातियाँ डी. के. 31/10/2016
  5. MANOJ KUMAR 28/10/2016
    • निवातियाँ डी. के. 31/10/2016
  6. sarvajit singh 28/10/2016
    • निवातियाँ डी. के. 31/10/2016
  7. kiran kapur gulati 28/10/2016
    • निवातियाँ डी. के. 31/10/2016
  8. Dr Swati Gupta 28/10/2016
    • निवातियाँ डी. के. 31/10/2016
  9. डॉ. विवेक 28/10/2016
    • निवातियाँ डी. के. 31/10/2016
  10. mani 28/10/2016
    • निवातियाँ डी. के. 31/10/2016
  11. Kajalsoni 28/10/2016
    • निवातियाँ डी. के. 31/10/2016
    • निवातियाँ डी. के. 31/10/2016

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