“एक खत 12″……. काजल सोनी

प्रेमी -कदम लड़खड़ा से गये मेरे ,फिर भी थामा था तुम्हें ।करीब दिल के बसा कर ,अपना माना था तुम्हें ।हसरत थी मेरे दिल की ,तुम्हें अपना बना सकुं ।हर मजबूरियों को भुला कर,सिने से लगा सकुं ।जाना चाहो तो चली जाओ दुर मुझसे ,मै कैसे रुला सकता हूं ,खुदा से खुद रो कर मांगा था तुम्हें ।प्रेमिका -थामा जो तुमने वो हाथ मेरा ,फिर क्यूँ दे न सके तुम साथ मेरा ।सिने से लगा कर हर वक्त मुझे आजमाते रहे ,दिल की बेताबियो से मेरी बेताबियॉ बढाते रहे ।मै कैसे जी सकती हूं बिन तेरे ,तुम्हें क्या खबर ,उस खुदा को इतने सिद्दत से मना कर,अश्कों को, आँखों से मेरे भी तुम गंवाते रहे । ।”काजल सोनी”

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18 Comments

  1. Subhash soni 28/10/2016
    • Kajalsoni 29/10/2016
  2. sarvajit singh 28/10/2016
    • Kajalsoni 29/10/2016
  3. babucm 28/10/2016
    • Kajalsoni 29/10/2016
  4. mani 28/10/2016
    • Kajalsoni 29/10/2016
  5. निवातियाँ डी. के. 28/10/2016
    • Kajalsoni 29/10/2016
    • Kajalsoni 29/10/2016
  6. Shishir "Madhukar" 29/10/2016
    • Kajalsoni 29/10/2016
    • Kajalsoni 29/10/2016
  7. Dr Swati Gupta 29/10/2016
    • Kajalsoni 30/10/2016

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