“औरत 2″…. काजल सोनी

घर के आंगन में,जब वो श्रद्धा के दीप जलाती है,निरसता से भरी जिंदगी,तब खुशियों से जगमगाती है ।दिल में कोई अरमान ,जब वो सजाती है ।तो पुरी सिद्दत से ,फिर ये कायनात भी झुक जाती हैं ।प्रेम के रिश्तों में बंधकर ,जब वो घर किसी का बसाती हैं।रिश्तों की बगियाँ ,फिर फुलो से भर जाती हैं ।जब वो चूड़ियाँ भरे हाथों से ,तपते हुए तवे पर , रोटियाँ पकाती है।जिंदगी में असली मिठास,तब नजर आती हैं ।माथे पर हाथ फेर कर ,जब वो लोरियाँ सुनाती है ।बचपना भी गीत बनकर,खूब मुस्कुराती है ।थाम कर दामन जब वो घर आती हैं ,मकानों में तो सभी रहते हैं ,मगर वो औरत ही हैं जो ,किसी मकान को घर बनाती हैं ।किसी के शब्दों में नहीं वो ताकत,जो औरत की खूबियों को बयां कर सके,यु ही नहीं ,” ये शक्ति कहलाती हैं ” । ।” काजल सोनी “

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22 Comments

  1. Shishir "Madhukar" 27/10/2016
    • Kajalsoni 28/10/2016
  2. babucm 27/10/2016
    • Kajalsoni 28/10/2016
  3. निवातियाँ डी. के. 27/10/2016
    • Kajalsoni 28/10/2016
  4. Subhash soni 27/10/2016
    • Kajalsoni 28/10/2016
  5. Meena Bhardwaj 27/10/2016
    • Kajalsoni 28/10/2016
  6. MANOJ KUMAR 28/10/2016
    • Kajalsoni 28/10/2016
  7. sarvajit singh 28/10/2016
    • Kajalsoni 28/10/2016
  8. kiran kapur gulati 28/10/2016
    • Kajalsoni 28/10/2016
  9. Dr Swati Gupta 28/10/2016
  10. Kajalsoni 28/10/2016
  11. mani 28/10/2016
    • Kajalsoni 28/10/2016
    • Kajalsoni 28/10/2016

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