कैसे ?:-विजय

जिंदगी खुद की उलझी हैऔरो की सुलझाऊँ कैसेएक भटका राही हूँ मैंऔरो को राह बताऊँ कैसेचिराग जब खुद का बुझा हैऔरो का घर रोशन करू मै कैसेझोली है मेरी गमो से भरी औरो को खुशी बाटूँ मै कैसेअंजान हूँ मै खुद अपने पहचान सेऔरो की पहचान बनूँ मै कैसेलडखडा रहे है जिसके कदमऔरो को चलना सिखाऊँ कैसेढूंढ रहे है जो शांति मन काऔरों को उसका पता बताऊँ कैसेजो तन्हा हूँ खुद मे मैऔरों की महफिल सजाऊँ कैसे

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15 Comments

  1. Meena Bhardwaj 01/03/2017
    • vijaykr811 01/03/2017
  2. ANU MAHESHWARI 01/03/2017
    • vijaykr811 01/03/2017
  3. Shishir "Madhukar" 01/03/2017
  4. vijaykr811 01/03/2017
  5. Kajalsoni 01/03/2017
    • vijaykr811 04/03/2017
  6. डी. के. निवातिया 01/03/2017
    • vijaykr811 04/03/2017
  7. babucm 01/03/2017
    • vijaykr811 04/03/2017
  8. Madhu tiwari 04/03/2017
    • vijaykr811 06/03/2017
    • vijaykr811 06/03/2017

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