इस दिवाली मेरे घर का पता दें दो

बता दो बता दो ख़ुशी को पता दे दो,
इस दिवाली मेरे घर का पता दें दो।।
हर कारीगर की नज़र डूडँती हैं,
आशा अभिलाषा से पूछती है ।।
दमक की ज्योति मुस्कान की झङी देदो,
बता दो बता दो खुसी को पता दें दो।।
एक प्रश्न हम सबसे पूछते है ?
व्यापारी नौकरशाही वोनस की आस करें,
दिवाली पर हर घर अरमान हैं सजतें।।
भारी छूट का पासा फैकें हैं व्यापारी ,
लक्ष्मी जी सब आगमन हैं करते।।
नौकरशाही को मिला वोनस तो,
लक्ष्मी जी की अनुभूती सब है करते।।
फिर हम क्यों? कारीगार ख़ुशी से दूर….
बता दो बता दो ख़ुशी को पता दें दो,
इस दिवाली मेरे घर का पता दें दो।।
फ़ुटपाथ चौराहा पर लगाई है फैरी,
आशा की नज़र हर राहगीर को देखती।।
कुम्हार के दीपको को दें दो बसेरा,
धुनकर की रूही को दें दो उजाला ।।
तेल के कीप को बुलालो घर आगन,
मिट्टी की प्रतिमाओ से चौकी सजालों।।
लताओ वेलो लङियो से दरवाज़ा सजालों,
रंगो से बनाके रंगोली अलख को जगालों।।
बता बता ख़ुशी को पता दें दो…………….
इस दिवाली मेरे घर का पता दं दो………।।
ऊँची दुकानो के मेहमान जरा,
फ़ुटपाथ पर दर्शन तो दें दो।।
चीनी लडझडियो से भी आगें,
मेरे दीपको को भी घर का पता दें दो।।
फ़ुटपाथ पर सजें सामानो को साहिब,
अपने घर की मेम शोभा बढ़ा लो ।।
परम्पराओ में हमारी भी अरज कर लों,
फ़ुटपाथ से सब दिवाली की आस कर लो।।
बता दो बता दो ख़ुशी को पता दें दो,
इस दिवाली मेरे घर का पता दें दो……….।।
हर कारीगर की नज़र डूडती हैं,
आशा अभिलाषा से पूछँती है।।
दमक की ज्योति मुस्कान की झङी दें दो,
बता दो बता दो ख़ुशी को पता दें दो।।

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4 Comments

  1. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 25/10/2016
  2. डॉ. विवेक डॉ. विवेक 26/10/2016

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