महल और मचान – शिशिर मधुकर

जिन्दगी तूने मुझे ये कैसी अजब पहचान दीचोर सारे मिल गए शमशीरे मुझ पर तान दीजो बना मुझसे वो मैं सबके लिए करता रहामैंने माँगा तो सभी ने मुझे दुखों की खान दीहसरतें बहुत थी मगर समय से ना लड़ सका इच्छाए सारी मर गई हाथों में जब कमान दीअपनों को मैंने हरदम पूजा में शामिल कियापर किसी ने ना कभी भी मेरे लिए अजान दीजिन्दगी तुझसे अब मुझको कोई गिला नहीँ कुछ सोच कर तूने यहाँ महल और मचान दीशिशिर मधुकर

Оформить и получить экспресс займ на карту без отказа на любые нужды в день обращения. Взять потребительский кредит онлайн на выгодных условиях в в банке. Получить кредит наличными по паспорту, без справок и поручителей

19 Comments

  1. RAJEEV GUPTA 25/10/2016
  2. Rajeev Gupta 25/10/2016
    • Shishir "Madhukar" 25/10/2016
  3. निवातियाँ डी. के. 25/10/2016
    • Shishir "Madhukar" 25/10/2016
  4. babucm 25/10/2016
    • Shishir "Madhukar" 25/10/2016
  5. sarvajit singh 26/10/2016
    • Shishir "Madhukar" 26/10/2016
    • Shishir "Madhukar" 26/10/2016
  6. Meena Bhardwaj 26/10/2016
    • Shishir "Madhukar" 26/10/2016
  7. Dr Swati Gupta 26/10/2016
  8. Shishir "Madhukar" 26/10/2016
  9. Kajalsoni 27/10/2016
    • Shishir "Madhukar" 30/10/2016
  10. MANOJ KUMAR 28/10/2016
    • Shishir "Madhukar" 30/10/2016

Leave a Reply