देश का बुरा हाल है||

देश का बुरा हाल है

हर किसी की ज़ुबाँ पर बस यही सवाल हैकरने वाले कह रहे, देश का बुरा हाल है||नेता जी की पार्टी मे फेका गया मटन पुलावजनता की थाली से आज रूठी हुई दाल है||राशन के थैले का ख़ालीपन  बढ़ने लगाहर दिन हर पल हर कोई यहाँ बेहाल है||पैसे ने अपनो को अपनो से दूर कर दियाग़रीबी मे छत के नीचे राजू और जमाल है||आंशु बहा-बहा कर भी थकता कहाँ है वोये ग़रीब की अमीर आँखो का कमाल है||

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10 Comments

  1. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 25/10/2016
  2. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 25/10/2016
  3. C.M. Sharma babucm 25/10/2016
  4. Kajalsoni 27/10/2016

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