“फिर मिलते हैं”

लम्बी खामोशी के बादएक दिन आवाज आई“चलो फिर मिलते हैं’तीर सी सिहरनसमूचे वजूद को सिहरा गईकुछ देर की चुप्पीऔर अन्तस् से एक आवाज उभरीऐसा है – “वक्त गुजर गया”अब की बार नहीअगली  बार मिलेंगेबहुत काम बाकी हैंजो हमारे साझी थेकुछ मेरे और कुछ तुम्हारेतुम्हारे पास शायद फुर्सत हैकुछ पुनरावलोकन कर लोअगली बार ऐसा करनामेरे और तुम्हारे काम साझा करनाअगर उसने चाहा तोतो एक बार और सही“चलो फिर मिलते हैं .”

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“मीना भारद्वाज”

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17 Comments

  1. babucm 23/10/2016
    • Meena Bhardwaj 23/10/2016
  2. mani 23/10/2016
    • Meena Bhardwaj 23/10/2016
  3. Manjusha 23/10/2016
    • Meena Bhardwaj 23/10/2016
  4. Shishir "Madhukar" 23/10/2016
  5. Meena Bhardwaj 24/10/2016
  6. Kajalsoni 24/10/2016
    • Meena Bhardwaj 24/10/2016
  7. निवातियाँ डी. के. 24/10/2016
    • Meena Bhardwaj 24/10/2016
  8. vijay kumar singh 25/10/2016
  9. Meena Bhardwaj 26/10/2016
  10. ALKA 24/03/2017
    • Meena Bhardwaj 24/03/2017

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