दीवाना हो चला है

तेरी आरज़ू मे पागल वो दीवाना हो चला है शमा की चाह मे घायल परवाना हो चला है अपनी खबर नहीं न जमाने का पता है उसे नजरों से छलक जाने को पैमाना हो चला है । मंजिल कहाँ है कुछ जानता नहीमुश्किलें कितनी है मानता नहींइश्क़ का असर है सब कुछ भुला दिया सिवा तेरे कुछ और ये पहचानता नहींप्यासा आज खुद मयखाना हो चला है तूफान से मिलने को आशियाना हो चला है ।ख्वाबों मे तेरी परछाई को तरसे महफिल मे हर पल तनहाई को तरसे है गुमसुम मगर धड़कने कह रही अरमानो मे बजती शहनाई को तरसे पुरवाइयों का बादल आवारा हो चला है कारवां-ए-मोहब्बत मे बंजारा हो चला है । ………………देवेंद्र प्रताप वर्मा”विनीत”

Оформить и получить экспресс займ на карту без отказа на любые нужды в день обращения. Взять потребительский кредит онлайн на выгодных условиях в в банке. Получить кредит наличными по паспорту, без справок и поручителей

5 Comments

  1. Shishir "Madhukar" 22/10/2016
  2. babucm 22/10/2016
  3. mani 22/10/2016
  4. निवातियाँ डी. के. 22/10/2016

Leave a Reply to विजय कुमार सिंह Cancel reply