कभी हमको अपना साथी बनाते

कभी हमको अपना साथी बनाते मेरी हसरतों को दिल से लगाते,तुम्हें सौंप देते हम मुस्कान अपनीएहसास-ए ग़म जो हमे तुम दिलाते । कब तक ग़म को छुपाते रहोगे खामोश दिल को जलाते रहोगे, अगर मान लेते हमारा भी कहना तो फिर तुम न यूं ऐसे आँसू बहाते । साथ निभाने के वादे किए तुमने जब वक़्त आया तो हाल न पूछा, जो तन्हाइयों मे मेरे साथ होते तो खुद को जमाने मे तन्हा न पाते ।हमे बेवफा कह के दिल से निकाला खुद भी वफा से किनारे रहे तुम, अगर याद होती जफ़ायें भी तुमको तो एक पल मे कैसे हमे भूल जाते । जमाने ने तुमको ठुकरा दिया तोनजर मे हमारी उतरने को आए, तुम इस कदर यूं न बर्बाद होते क्या है मोहब्बत अगर जान जाते। देवेंद्र प्रताप वर्मा “विनीत”

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5 Comments

  1. Manjusha 20/10/2016
  2. mani 21/10/2016
  3. Shishir "Madhukar" 21/10/2016
  4. babucm 21/10/2016
  5. निवातियाँ डी. के. 21/10/2016

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