जमाना भूल जाता हूँ।

जब भी तुम्हारी चाहत में मै हद से ज्यादा   डूब जाता हूं।कोई  नयी पंक्ति की धुन  को जब जब भी  तुम्हे सुनाता हूँ।जब भी तुम सुनते-सुनते  हँस कर चुप हो जाते हो।हाल ए दिल बतलाने में जब भी तुम शर्माते हो।अपनी भावनाओ की हलचल भी मुझसे तुम पूछ जाते होसाथ में जीवन बिताने का जब सपना तुम फरमाते हो।तब  आँखों में देखता हूं और तुम्हे सताना भूल जाता हूं।मेरी रूह में उतरती हो ,और जमाना भूल जाता हूँ।

Оформить и получить экспресс займ на карту без отказа на любые нужды в день обращения. Взять потребительский кредит онлайн на выгодных условиях в в банке. Получить кредит наличными по паспорту, без справок и поручителей

4 Comments

  1. shrija kumari 19/10/2016
  2. Prem 19/10/2016
  3. Markand Dave 20/10/2016
  4. निवातियाँ डी. के. 20/10/2016

Leave a Reply to निवातियाँ डी. के. Cancel reply