जल

गाँव गाँव गली गली शहर शहर आज , जाके जन जन को यही तो समझाना है ,जल बिनु तड़पें मछली सरीखे हम , इसके ही पहले लोगों को ए बताना है ,जलचर, नभचर,थलचर के लिए ही , बेटी बेटा सम आज जल को बँचाना है ,विश्वयुद्ध हो न कहीं अगला इसी के लिए , घर घर यही संदेशा पहुंचाना है ।

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3 Comments

  1. डॉ. विवेक डॉ. विवेक 18/10/2016
  2. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 18/10/2016
  3. C.M. Sharma babucm 18/10/2016

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