वो रात

वो रातबिती थी कई रातेंवो करवटें लेते हुएजब दी आवाज़ प्रीत की शहनाईयों नेवो पहली बार मिलनातेरा तन्हाईयों मेशर्मा कर यूँ झुकना तेरी पलकों कायूँ शहमे हुए आना तेराचुपके से मेरी आगोश मेअध खिले फूलों की चादरों पेचॉदनी की मध्म रोशनी मे तेरे सॉसों ने कहीवो तेज धडकनों की दास्तानवो अहसास जिसेबयॉ नहीँ कर पाई ये जुबानउस रात की वो बात तुमसे अगर कोई पूछे तो कह देना तुम भी ये पलके झुका केचॉद छुपा आशमान मेसूरज निकला था जल्दीअभी रात बिती कहॉ थी ।

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4 Comments

  1. डॉ. विवेक Dr. Vivek Kumar 17/10/2016
  2. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 17/10/2016
  3. C.M. Sharma babucm 17/10/2016
  4. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 18/10/2016

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