बहुत दिनों के बाद…

आया है मनभावन मौसमबहुत दिनों के बादबहुत इंतजार के बाद…आये हैं ढेर सारे फूलबूढ़ी काकी के अमरूद के गाछ में…आये हैं दो छोटे-छोटे चमकीले दूधिया दाँतभाभी के मुन्ने के मुँह में अबकी सावन में…आई है खुशबू लिए बसंती हवा का संदली झोंकाप्रियतम के जुल्फों और उसके बदन को हौले से छूकर…कबरी गैया ने इसी माह जना हैएक सुन्दर-सी बछिया काली-चिती-सी…सजने लगी है फिर सेतरह-तरह के मिठाइयों और खिलौनों की दुकानेंईदगाह में सालाना जलसे की तैयारी में…फिर लगने लगे है आँगन में मिट्टी के बर्तनों के ढेरशुरू किया है बदरी काका ने अपना कामलम्बी बीमारी से उबरने के बाद…मन की आस्था और मजबूत हुई है बड़ी बहूरिया की अपने पति के दूर देश से वापसी कीपूरे पाँच सालों के बाद भी…जारी है अनवरत आने-जाने मिलने और बिछुड़ने का सिलसिला इस दुनिया मेंऐसे में तुम कब आओगे?डॉ. विवेक कुमारतेली पाड़ा मार्ग, दुमका-814 101(c) सर्वाधिकार सुरक्षित।

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5 Comments

  1. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 16/10/2016
  2. C.M. Sharma babucm 16/10/2016
  3. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 17/10/2016
  4. Dr Swati Gupta Dr Swati Gupta 17/10/2016
  5. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 17/10/2016

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