मेरा ठिकाना-८ –मुक्तक—डी के निवातियाँ

दरख्त मिटे गए मिटा परिंदो का आशियाना खेत खलिहानों को मिटा, बना लिया घराना इस कदर विकास हावी हुआ इस जमाने में पशु पक्षी दूजे से पूछे, कहाँ है मेरा ठिकाना !!!!!डी के निवातियाँ [email protected]

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14 Comments

  1. mani 21/10/2016
    • निवातियाँ डी. के. 24/10/2016
  2. Shishir 21/10/2016
    • निवातियाँ डी. के. 24/10/2016
  3. MANOJ KUMAR 21/10/2016
    • निवातियाँ डी. के. 24/10/2016
  4. babucm 21/10/2016
    • निवातियाँ डी. के. 24/10/2016
    • निवातियाँ डी. के. 24/10/2016
  5. Dr Swati Gupta 22/10/2016
    • निवातियाँ डी. के. 24/10/2016
  6. Rajeev Gupta 22/10/2016
    • निवातियाँ डी. के. 24/10/2016

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