हम दुश्मनी फिर क्यों निभाने लगे……

घर दूसरे का सब जलाने लगे,हम दुश्मनी फिर क्यों निभाने लगे।।भीगी लहू से अब जमीं हर तरफ,क्यों जोर हम फिर आजमाने लगे।।माँगा मुरादों में खुदा से कभी,क्यों उन चिरागो को बुझाने लगे।।घर में निवाला है नहीं खाने को,हम रोज खुद को बम बनाने लगे।।हम बात करते अम्न की खूब परखुद दीप इसका क्यों बुझाने लगे।।है बन्द कमरों में पड़ा बचपन कहींनापाक सपने जब सजाने लगे।।कोई नहीं अब चाहता बैर कोफिर लफ्ज क्यों हम को जलाने लगे।।क्या हो रहा हासिल ‘मनी’ तू बताहर वक्त क्यों मातम मनाने लगे।।

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8 Comments

  1. MANOJ KUMAR 14/10/2016
    • mani 18/10/2016
  2. Savita Verma 14/10/2016
    • mani 18/10/2016
  3. Shishir "Madhukar" 14/10/2016
    • mani 18/10/2016
  4. Manjusha 14/10/2016
    • mani 18/10/2016

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