दिल पर उसके , खुद का राज नहीं चलता

वेबस हो जाता है, हर एक शख्स़ मोहब्बत में…

दिल पर उसके , खुद का राज नहीं चलता

 फिसलने लगती है हर एक चीज, उसके हाथों सेअति के साथ कोई नहीं चलता गैरों को भी धोखा न दोबुरे वक्त में भी पुण्य नहीं चलता दिन बदलता है, रात भी ढलती हैइस अफसाने में भी, मेरा यार नहीं बदलता अक्सर भूल जाते हैं लोग, दूसरों की नेकियाँओरों की मदद करने में, पैर है फिसलता खूब रचाओ स्वांग तुम दुनिया केरिश्ता(घर) है प्यार पर चलता मत तड़पाओ तुम किसी बेगुनाह कोउसके(भगवान) इंसाफ के आगे कुछ नहीं चलता प्यार नहीं है , बेझिझक कह दोमोहब्बत का जनाज़ा , हर रोज नहीं निकलता झूठा प्यार जताकर, बदनाम न कर मोहब्बतउसकी हर एक आह पर, आँसुओं का समंदर, हैं निकलता खौफ कर खुदा का, न बरसा कहर धर्म परइबादत में कोई, मंदिर-मस्जिद नहीं चलता चलता है तो एक उसूलइंसानियत हैं दिलों में, तो कोई मैल नहीं चलताकवि-भागचन्द अहिरवार “निराला”

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  1. C.M. Sharma babucm 14/10/2016

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