खुद से खुद की लड़ाई

किस की तलाश है ,और क्या ढूंढ लाये हैंपूरा पाने की चाह में,एक हिस्से पीछे छोड़ आये हैं.कोनसी डगर किस ओर लेकर जाए,मालूम नहींमगर जो पगडंडी घर तक जाती थी, उसके निशान मिटा आये हैं.सपनो की नयी दुनिया के लालच में ,यादो के अतीत से सौदा कर आयेनकाब बदलते बदलते ,खुद की पहचान ही अपने से जुदा कर आये.मंजल पाने के जूनून में ,सही गलत का फर्क भूलेएक नयी कहानी लिखने के मद में ,अनकहे कई अधूरे किस्से दफना आये.जो सड़क मेरे शहर को जाती थी ,अनजान पड़ती है आज राह बदलते बदलते, किसी अजनबी शहर की राह पे आ खड़े हुए .ख्वाहिशों के बोझ तले ,ख्वाबों की आवाज़ को दबा आयेखुद से खुद की इस लड़ाई में अपना अस्तित्व ही पीछे छोड़ आये.

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5 Comments

  1. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 28/09/2016
  2. babucm 28/09/2016
  3. Shishir "Madhukar" 28/09/2016
  4. mani 28/09/2016

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