ये तय है कि बिन तुम्हारे में जी नही सकता।

तुम्हारे ख्यालातों की डोर मैं तुमको दे नही सकता।नाराज हो कर भी मै नाराज तुमसे हो नही सकता।ये दूरी की साजिश है जो तुम हमसे रूठते हो ,ये तय है कि बिन तुम्हारे में जी नही सकता। ……..

तुम्हारे गुस्से की लपटों को में हंस हंस कर सह जाऊंगा।तुम्हारी आँखों में मैं अपना एक चहरा बनाऊगा।हर पल याद न आओ ऐसा हो नही सकता।ये तय है कि बिन तुम्हारे मैं जी नही सकता। ……..तुम्हे हँसना सिखाता हूँ। और खुद रो जाता हूँ। .कभी खुद हंस कर के तुम्हे रुलाता हूँ।धड़कू न तुम्हरे दिल में ये हो नही सकता,ये तय है कि बिन तुम्हारे मै जी नही सकता। ……मै पकड़ता हू भले ही बहुत कसके तुम्हारी हथेली को ,मै समझता हु बहुत तूम्हारी अनसुलझी पहेली को ,तुम्हारी आंख में मै अश्क़ बनकर आऊ ये हो नही सकता ,ये तय है कि बिन तुम्हारे मै जी नही सकता।मेरे सपनो में आता है कोई घूँघट ओढ़ कर केमुझे नींदों से जगाता है खुदकी नींद तोड़ कर के ,मुझे मालूम है तुम्हारे सिवा कोई और वो हो नही सकता।ये तय है कि बिन तुम्हारे मैं जी नही सकता।हंसू कितना भी मै तुम्हारी नादानियों पे ,डरु कितना भी मै तुम्हारी नारजगियों से ,लाख गलतियां की हो शिकायत कर नही सकता।ये तय है कि बिन तुम्हारे मै जी नही सकता।हक़ क्या क्या है मेरा तुम पर तुम्हे मालूम है सबकुछमुझपे अधिकार है कितना मुझे मालूम है सबकुछ ,मेरे चाक जिगर के तुम्हारे सिवा कोई सीं नही सकता। .ये तय है कि बिन तूम्हारे मै जी नही सकता।

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11 Comments

  1. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 27/09/2016
    • premkumarjsmith 28/09/2016
  2. निवातियाँ डी. के. 27/09/2016
    • premkumarjsmith 28/09/2016
  3. Bindeshwar prasad sharma 27/09/2016
    • premkumarjsmith 28/09/2016
  4. babucm 27/09/2016
    • premkumarjsmith 28/09/2016
  5. astha gangwar 28/09/2016
    • premkumarjsmith 19/10/2016

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