“शहर के लोग”

‘’ शहर के लोग ‘’ मिलें, तो बताना चारो तरफ घिरा है अंधेरा,बस एक लौ के खातिर कोई दीपक जलानादीपक प्रकाश और देख चकाचौंध भरी उजालायही शहर है, इधर मत आना‘’ शहर के लोग ‘’ मिलें, तो बतानाशहर में लोग हैं, पर लोग शहर के नहींमतलबी, जालसाजी फिर मककारी,ये है इनकी फितरत भरी कलाकारी चाहे जहॉं भी जाये, प्रोइवेट या सरकारीफिर आलिशान बंगला देखो या घर- तहखाना‘’ शहर के लोग ‘’ मिलें, तो बतानामैंने जानना चाहा,पुछ उन सबसेसबने यही कहा, शहर में हो कबसे ?छोड़ो अपनी रूसवाई, यही है जमानायहॉं लोग शहर के है, जिसे फुर्सत कहॉंतरीका कुछ भी हो, ये हैं जानते सिर्फ व सिर्फ दौलत कमाना‘’ शहर के लोग ‘’ मिलें, तो कोई हमें भी बताना – हमें भी बतानाचारो तरफ घिरा है अंधेरा,बस एक लौ के खातिर कोई दीपक जलानादीपक प्रकाश और देख चकाचौंध भरी उजालायही शहर है, इधर मत आना‘’ शहर के लोग ‘’ मिलें, तो बताना *** ***

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7 Comments

  1. निवातियाँ डी. के. 26/09/2016
  2. mani 26/09/2016
  3. Bindeshwar prasad sharma (bindu) 26/09/2016
  4. Ashok Mishra 26/09/2016
  5. अकिंत कुमार तिवारी 26/09/2016
  6. Kajalsoni 26/09/2016
  7. babucm 26/09/2016

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