हार-7……सी.एम्. शर्मा (बब्बू)…

इतनी ग्लानि…इतनी कुंठा…इतनी शर्म…अपने आप पे…कभी महसूस नहीं की थी….शायद इस लिए भी कि ज़िन्दगी में कभी…अपने को जानने की इच्छा ही नहीं थी…दूसरों की बुराईयां ढूंढते रहा….दूसरों को ही बदनाम करता रहा…या डरता रहा अपनी बुराईओं से…बाहर आयी तो क्या होगा….कुछ भी था पर अपने को नहीं जानता था…मैं…बस….आज अपने को मिलना चाहता हूँ….तो अपने को ही नहीं पहचान पा रहा….इतना घिणौना सा चेहरा है मेरा….ऐसे लग रहा जैसे किसी अजनबी से मिल रहा हूँ….ऐसा अजनबी जो मुझपे हँसता जा रहा है…और मैं अवाक उसको देख रहा हूँ…कर भी क्या सकता हूँ….विचलित हूँ अपनी ही दशा पे…रोना चाहता हूँ…चिल्लाना चाहता हूँ….किसी पे नहीं सिर्फ अपने पे….पर वो भी नहीं कर पा रहा हूँ…लोग कहेंगे कि कितना कमज़ोर है…मर्द हो के रोता है….रोना भी है तो दूसरे की मर्जी से…कितना असहाय सा हूँ मैं…दूसरों के दिए नामों से जाना जा रहा हूँ….दूसरों की दी प्रशंसा की ख़ुशी में नाच रहा हूँ…गौर्वानित हो रहा हूँ….अपना कुछ भी नहीं…नाम…शोहरत…पहचान…सब किराए का….मेरा अपना है क्या….कौन हूँ मैं…घिन्न आती है मुझे अपने आप से…जब ये सवाल अपने से करता हूँ…मजबूरी है…करना पड़ रहा है…कितना बेबस हूँ…मैं….\/सी.एम्. शर्मा (बब्बू)

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26 Comments

  1. mani 26/09/2016
    • babucm 26/09/2016
  2. Bindeshwar prasad sharma 26/09/2016
    • babucm 26/09/2016
    • babucm 26/09/2016
  3. Shishir "Madhukar" 26/09/2016
    • babucm 26/09/2016
  4. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 26/09/2016
    • babucm 26/09/2016
  5. Kajalsoni 26/09/2016
    • babucm 26/09/2016
    • babucm 26/09/2016
  6. निवातियाँ डी. के. 26/09/2016
    • babucm 26/09/2016
  7. Gayatri Dwivedi 26/09/2016
    • babucm 26/09/2016
  8. Meena Bhardwaj 26/09/2016
    • babucm 28/09/2016
  9. ALKA 20/10/2016
    • babucm 20/10/2016
  10. Markand Dave 24/10/2016
    • babucm 24/10/2016
  11. sarvajit singh 25/10/2016
    • babucm 26/10/2016

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