तुम ——-(डी के निवातियाँ)

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फूलो में खिलता गुलाब तुम
कलि में झलका निखार तुम
बागो में छाई कोई बहार तुम
सितारों में चमकता चाँद तुम
जवाँ हुस्न निखरा शबाब तुम
बहकी अदाओं की शराब तुम
नशीली अदाओं की कटार तुम
शोलो में जो दहके वो आग तुम
कवि की कल्पना का सार तुम
शायर का अनकहा कलाम तुम
सरगम से निकली सुर ताल तुम
बंदिश पे बजता कोई साज तुम
सागर में ढलती कोई शाम तुम
मद से भरा छलकता जाम तुम
जैसे चन्दन से लिपटा साँप तुम
नींद में देखा हो कोई ख्वाब तुम
बिना उत्तर का जैसे सवाल तुम
असुल्झी पहेली का जबाब तुम
किसी के चहरे का रुआब तुम
धड़कते अरमानो का हवाल तुम
मचलती हवाओं का हो राज़ तुम
किसी की जिन्दगी का आज तुम
पहली किरण का हो आगाज तुम
चहकते पंछियों की आवाज तुम
मेरे हरपल हर लम्हे का अंजाम तुम
मेरा भूत, भविष्य और वर्तमान तुम
मेरी हर साँस हर धडकन का नाम तुम
मेरी हर ख़ुशी हर गम की पहचान तुम ।।

डी के निवातियाँ——–

30 Comments

  1. शीतलेश थुल 24/09/2016
    • निवातियाँ डी. के. 26/09/2016
    • निवातियाँ डी. के. 26/09/2016
  2. ANAND KUMAR 24/09/2016
    • निवातियाँ डी. के. 26/09/2016
  3. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 24/09/2016
    • निवातियाँ डी. के. 26/09/2016
    • निवातियाँ डी. के. 26/09/2016
  4. Shishir "Madhukar" 24/09/2016
    • निवातियाँ डी. के. 26/09/2016
  5. Ashok Mishra 24/09/2016
    • निवातियाँ डी. के. 26/09/2016
  6. babucm 24/09/2016
    • निवातियाँ डी. के. 26/09/2016
  7. Kajalsoni 24/09/2016
    • निवातियाँ डी. के. 26/09/2016
  8. Dr. Vivek Kumar 24/09/2016
    • निवातियाँ डी. के. 26/09/2016
  9. Meena Bhardwaj 25/09/2016
    • निवातियाँ डी. के. 26/09/2016
  10. MANOJ KUMAR 26/09/2016
    • निवातियाँ डी. के. 26/09/2016
  11. MANOJ KUMAR 26/09/2016
    • निवातियाँ डी. के. 26/09/2016
  12. Markand Dave 24/10/2016
    • डी. के. निवातिया 24/03/2017
  13. vijaykr811 24/03/2017
    • डी. के. निवातिया 24/03/2017

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