नई कलियाँ खिलाओ तुम – शिशिर मधुकर

याद कोई बोझ बन जाए तो उसको भूल जाओ तुम
कोई तुमसे बचे तो उसके कभी ना पास जाओ तुम

मुहब्बत को सदा ताकत बनाओ खुद मुस्कुराने की
अगर आँसू बहाती है तो इसे भी मत निभाओ तुम

दिल को तड़पाते रहने से कभी तमगे नहीँ मिलते
हाथ पकडो ज़माने का ये नज़रें फ़िर मिलाओ तुम

कभी तूफान आते हैं तो पथिक भी डोल जाते हैं
बनाओ कारवां फ़िर और नए सपने सजाओ तुम

पीछे देख कर जीना बस समय बरबाद करना है
नए बीजों को सीँचो और नई कलियाँ खिलाओ तुम.

शिशिर मधुकर

23 Comments

  1. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 23/09/2016
  2. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 23/09/2016
    • Shishir "Madhukar" 23/09/2016
  3. Markand Dave 23/09/2016
    • Shishir "Madhukar" 23/09/2016
  4. शीतलेश थुल 23/09/2016
    • Shishir "Madhukar" 23/09/2016
    • Shishir "Madhukar" 23/09/2016
  5. bharti das 23/09/2016
    • Shishir "Madhukar" 23/09/2016
  6. Bindeshwar prasad sharma (bindu) 23/09/2016
    • Shishir "Madhukar" 23/09/2016
  7. babucm 23/09/2016
    • Shishir "Madhukar" 23/09/2016
  8. Kajalsoni 23/09/2016
    • Shishir "Madhukar" 23/09/2016
  9. Meena Bhardwaj 23/09/2016
  10. Shishir "Madhukar" 23/09/2016
  11. निवातियाँ डी. के. 23/09/2016
  12. Shishir "Madhukar" 23/09/2016
  13. Dr Swati Gupta 23/09/2016
    • Shishir "Madhukar" 23/09/2016

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