चली जा रही है

जाने ये हालात हमें कहाँ ले चले,
दो पल पास बैठो, ये दिल कुछ कहना चाहता है।

फासला मिटा दो आज मेरे महबूब,
ये शख़्स तुझमे डूबना चाहता है।

बहुत लम्हात तेरे बिन गुजारे,
अब तो मुझे खुद से मिला दो।
मैं खामोश हो जाऊ
उससे पहले मुझे आगोश में सुला दो।

रक़ीब की बाहों में मुझसे मेरा सनम देखा नहीं जाता अब,
मेरा क़त्ल कर दो सनम,
मुहब्बत मेरी ज़िन्दगी से चली जा रही है,
लगता है बागों से कोई कली जा रही है।
चली जा रही है,
कली जा रही है………………

11 Comments

  1. shrija kumari 21/09/2016
  2. vinod kumar dave 22/09/2016
  3. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 22/09/2016
  4. Shishir "Madhukar" 22/09/2016
  5. vinod kumar dave 22/09/2016
  6. babucm 22/09/2016
  7. Bindeshwar prasad sharma 22/09/2016
  8. निवातियाँ डी. के. 22/09/2016
  9. vinod kumar dave 22/09/2016
  10. Markand Dave 23/09/2016

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