प्रेम-गीत

premgeet

वो आएंगे, सुना है आज आएंगे।
कर लू मैं सोलह श्रृंगार, सज-धज हो जाऊं भी तैयार,
फिर मेरे आँगन , दीप जगमगाएंगे।
वो आएंगे, सुना है आज आएंगे।

नैनो में काजल की हलकी सी धार, माँथे पे बिंदीया भी चमकदार,
फिर मेरे हाँथ, चूड़ियाँ खनक़ाएंगे।
वो आएंगे, सुना है आज आएंगे।

गले में पहनू नौ-लख्खा हार, कानों के झूमके भी जोड़ीदार,
फिर मेरी नथनी , उनका ध्यान भटकाएँगे।
वो आएंगे, सुना है आज आएंगे।

होंठों की लालिमा कर गुलजार, मांग सिन्दूर भी पहरेदार,
फिर मेरे पैर , पायल छनकाएंगे।
वो आएंगे, सुना है आज आएंगे।

देख लू दर्पण खुद को निहार,
देखू उतना, जैसे देखा है अभी पहली बार।
फिर मेरी धड़कनें, प्रेम गीत सुनाएंगे।
वो आएंगे, सुना है आज आएंगे।

शीतलेश थुल 

19 Comments

  1. शीतलेश थुल 21/09/2016
  2. RAJ KUMAR GUPTA 21/09/2016
    • शीतलेश थुल 22/09/2016
    • शीतलेश थुल 22/09/2016
  3. निवातियाँ डी. के. 21/09/2016
    • शीतलेश थुल 22/09/2016
  4. Shishir "Madhukar" 21/09/2016
    • शीतलेश थुल 22/09/2016
  5. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 22/09/2016
    • शीतलेश थुल 22/09/2016
  6. babucm 22/09/2016
    • शीतलेश थुल 22/09/2016
  7. Dr Swati Gupta 22/09/2016
    • शीतलेश थुल 22/09/2016
  8. Kajalsoni 22/09/2016
    • शीतलेश थुल 22/09/2016
    • शीतलेश थुल 23/09/2016

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