लोग क्या कहेंगें

सारी उम्र बिता दी हमने,
सोचते सोचते बस यही,
कि लोग क्या कहेंगे।
कभी मन हुआ ,
शैतानी करने का,
या मस्ती करने का कोई,
नाचने का या कूदने का,
न कर पाए यही सोचकर,
लोग क्या कहेंगे।।
हर इच्छाओं को दबाते रहे,
यूँ ही अपने मन को समझा रहे,
काम कोई करने से पहले,
सौ बार सोच लें जरा,
कि लोग क्या कहेंगे।।
जब कदम रखा ये हमने,
जिंदगी के अंतिम पड़ाव पर,
तो समझ में आया,
कि समय ही नहीं था,
किसी के पास,
हमारे बारे में सोचने के लिए।।
हम तो यूँ ही परेशां होते रहे,
यही सोच सोचकर,
कि लोग क्या कहेंगे।।
By: Dr Swati Gupta

19 Comments

  1. शीतलेश थुल 21/09/2016
    • Dr Swati Gupta 22/09/2016
  2. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 21/09/2016
    • Dr Swati Gupta 22/09/2016
  3. shrija kumari 21/09/2016
    • Dr Swati Gupta 22/09/2016
  4. Bindeshwar prasad sharma (bindu) 21/09/2016
  5. Shishir "Madhukar" 21/09/2016
    • Dr Swati Gupta 22/09/2016
    • Dr Swati Gupta 22/09/2016
  6. Kajalsoni 21/09/2016
    • Dr Swati Gupta 22/09/2016
  7. babucm 21/09/2016
    • Dr Swati Gupta 22/09/2016
  8. निवातियाँ डी. के. 21/09/2016
    • Dr Swati Gupta 22/09/2016
  9. Markand Dave 23/09/2016
    • Dr Swati Gupta 10/05/2018

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