हार-5……सी.एम्. शर्मा (बब्बू)…

“बड़ा कमज़ोर है आदमी अभी लाखों हैं इस में कमीं”…
बहुत सही लिखा गया है…सच में बहुत ही कमज़ोर हैं हम…
दूसरों से लड़ना हो तो पल में तैयार हो जाएंगे लड़ने को…
अपने आप से लड़ने में हिम्मत नहीं होती…

ऐसा ही मेरे साथ था…
मैं आपने आप से नहीं लड़ पा रहा था…
रह रह के दूसरों की अनकही बातें…
मन को व्यथित कर रही थी…
जो हुआ वो तो हो चूका था….
पर जो नहीं हुआ था अभी…उसी को सोच कर…
घर में सब क्या कहेंगे….
बाहर सब लोग क्या कहेंगे…
सब बातें करेंगे…मैं हार गया…
भाग गया मैदान से……
रेस में भाग लेने से पहले हार मान ली….
ग्लानि…कुंठा…टीस रह रह के…
मन में उबाल ला रही थी…
ऐसा था जैसे मेरा तो आस्तित्व है ही नहीं…

बहुत ही मुश्किल है अपने आप से लड़ना…
सच में….बहुत मुश्किल…
सबसे मुश्किल तो तब है जब…
पता चलने लगता है कि तुम…
तुम तो हो ही नहीं….
सिर्फ खिलौना मात्र हो…
जो सब के इशारों पे नाच रहा है…
कभी इधर कभी उधर…
और नचाने वाले मज़ा ले रहे हैं…
जब नहीं नाचते हो तुम….
तो आक्षेप लगते हैं…
कि किसी काम के नहीं हो…
कुछ नहीं आता…कुछ नहीं कर सकते तुम…
उलझ गया मैं…हर पल परेशान…ना इधर ना उधर….

हार रहा था मैं अपने आप से…
फिर से वही हार….
मुंह बाये खड़ी है…
हार………..
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/सी.एम्. शर्मा (बब्बू)

18 Comments

  1. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 21/09/2016
    • babucm 22/09/2016
  2. शीतलेश थुल 21/09/2016
    • babucm 22/09/2016
  3. Bindeshwar prasad sharma (bindu) 21/09/2016
    • babucm 22/09/2016
  4. Dr Swati Gupta 21/09/2016
    • babucm 22/09/2016
  5. Meena bhardwaj 21/09/2016
    • babucm 22/09/2016
  6. Shishir "Madhukar" 21/09/2016
    • babucm 22/09/2016
    • babucm 22/09/2016
  7. Kajalsoni 21/09/2016
    • babucm 22/09/2016
  8. निवातियाँ डी. के. 21/09/2016
    • babucm 22/09/2016

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