मेरी संवेदनाऐं

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कभी तो जान लो , मेरे मन की बात,
क्या हर बात बताना जरूरी है।
कभी तो रहने दो, राज़ को राज़ ,
क्या हर राज़ खोलना जरूरी है।
कभी तो दर्द बाँट लो मेरा,
क्या हर दर्द का इन आँखों में उतरना जरुरी है।
कभी तो समझो मेरे जजबातों को,
क्या हर बार बयाँ करना जरूरी है।
कभी तो सुन लो , जो मैं चाहती हू कहना ,
क्या बार-बार लफ्ज़ो का सहारा लेना जरुरी है।
कभी तो कर लो खुद से भी प्यार,
क्या हर बार मेरा जताना जरुरी है।
कभी तो निभाओं रिश्तों की इन कसौटियों को,
क्या हर अग्नि परीक्षा में , मुझे ही साबित करना जरुरी है।

शीतलेश थुल 

14 Comments

  1. Bimla Dhillon 19/09/2016
    • शीतलेश थुल 20/09/2016
  2. shrija kumari 19/09/2016
    • शीतलेश थुल 19/09/2016
  3. Bindeshwar prasad sharma 19/09/2016
    • शीतलेश थुल 19/09/2016
  4. Dr Swati Gupta 19/09/2016
    • शीतलेश थुल 19/09/2016
  5. Kajalsoni 19/09/2016
    • शीतलेश थुल 19/09/2016
  6. निवातियाँ डी. के. 19/09/2016
    • शीतलेश थुल 20/09/2016
  7. babucm 19/09/2016
    • शीतलेश थुल 20/09/2016

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