मैं कौन हूँ ?……………….मनिंदर सिंह “मनी”

मैं कौन हूँ,
क्यों इस जग में आया,
सोच कर उलझ जाता हूँ,
क्या है?,
पहचान मेरी,
क्या वजूद मेरा?
खुद को,
तलाशता रह जाता हूँ,
प्रसव के बाद,
मिला एक सांकेतिक नाम,
प्रसव से पहले,
क्या था ?
उलझ कर रह जाता हूँ
एक तरफ,
कर्म करना ही,
जीवन का उद्देश्य,
दूसरी तरफ,
सब कुछ कमाया,
जग में,
छोड़ जाता हूँ,
कभी अभिमान से भरा,
कभी पक्ष्ताप की,
आग में जल जाता हूँ,
सब मोह माया है,
सोच अकेला निकल,
तो कभी,
ग्रहस्थ जीवन में,
बंध जाता हूँ,
कभी सालो,
जीने की उम्मीद,
कभी पल में,
टूट कर बिखर जाता हूँ,
खाली हाथ आया,
इस जहान में,
खाली हाथ,
चला जाता हूँ,
जाने कहाँ से आया?
जाने कहाँ को जाना,
इस सोच में,
डूबा खुद में,
खो जाता हूँ,
मैं कौन हूँ………………………….

17 Comments

  1. Meena bhardwaj 16/09/2016
    • mani 17/09/2016
  2. babucm 16/09/2016
    • mani 17/09/2016
  3. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 16/09/2016
    • mani 17/09/2016
  4. Dr. Vivek Kumar 16/09/2016
    • mani 17/09/2016
    • mani 17/09/2016
  5. Kajalsoni 16/09/2016
    • mani 17/09/2016
  6. Prince Seth 17/09/2016
    • mani 17/09/2016
  7. ANU MAHESHWARI 17/09/2016
  8. निवातियाँ डी. के. 17/09/2016
  9. MANOJ KUMAR 19/09/2016

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