सुनामी

एक ऊंची लहर आती है, साथ बर्बादी लाती है,
पीछे तबाही का मंजर छोड़, साथ सबकुछ ले जाती है,
गगन चुम्भी इमारते, ये विशाल विशाल पेड़,
कल तक मेरे सामने, बनते थे जो शेर,
हिम्मत उनकी भी हार जाती है, जब एक ऊंची लहर आती है,
चाचा के चाय दूकान का तम्बू उड़ने लगता है,
सागर का खारा पानी, जब हिचकोले लेने लगता है,
आसमां को छूती पर्वत श्रृंखलायें भी डर जाती है,
जब एक ऊंची लहर आती है,
मौतों की मौजो पे बैठ, वो सबको गले लगाती है,
एक ऊंची लहर आती है, जो सुनामी कहलाती है …

शीतलेश थुल 

10 Comments

  1. mani 16/09/2016
  2. शीतलेश थुल 16/09/2016
  3. निवातियाँ डी. के. 16/09/2016
    • शीतलेश थुल 19/09/2016
  4. babucm 16/09/2016
    • शीतलेश थुल 19/09/2016
  5. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 16/09/2016
    • शीतलेश थुल 19/09/2016
    • शीतलेश थुल 19/09/2016

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