जीवन का सच

यह मेरा है
यह तेरा है
माेह माया का फेरा है।

जीवन तो
चंद दिनों का
डेरा है।

संबंधों
और रिश्तों का
यह तो बस एक
घेरा है।

लाख लिखे कोई
जीवन का कागज
रहता कोरा है।

इच्छाओं की गगरी
भरे कैसे
यही तो बस
एक फेरा है।

इश्क-जुनून और
रिश्तों की बगिया में मंडराता
स्वार्थ का भौंरा है।

डॉ. विवेक कुमार
तेली पाड़ा मार्ग, दुमका-814 101
(c) सर्वाधिकार सुरक्षित।

11 Comments

  1. mani 16/09/2016
  2. निवातियाँ डी. के. 16/09/2016
  3. Dr. Vivek Kumar 16/09/2016
  4. Dr. Vivek Kumar 16/09/2016
  5. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 16/09/2016
  6. Dr. Vivek Kumar 16/09/2016
  7. Dr. Vivek Kumar 16/09/2016
  8. Dr. Vivek Kumar 16/09/2016
  9. Meena bhardwaj 16/09/2016
  10. Dr. Vivek Kumar 16/09/2016

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