वक्त……………..मनिंदर सिंह “मनी”

किसी के रोके से रुकता नहीं वक्त,
किसी के झुकाये झुकता नहीं वक्त,

अपनी ही मदमस्त चाल चले जा रहा,
कभी भी कुछ भी पूछता नहीं वक्त,,

ना किसी राजे का, ना गरीब का हुआ,
सदैव आगे चले पीछे मुड़ता नहीं वक्त,

अचेत विश्व में हर कोई उसकी चाल से,
तबदीली की विधि को भुलता नहीं वक्त,

ना रंग, ना कोई आकार, ना कोई भेद,
कितना भी चाहो पर बंधता नहीं वक्त,,

वक्त……………..मनिंदर सिंह “मनी”

22 Comments

  1. अकिंत कुमार तिवारी 15/09/2016
    • mani 15/09/2016
    • mani 15/09/2016
  2. शीतलेश थुल 15/09/2016
    • mani 15/09/2016
  3. निवातियाँ डी. के. 15/09/2016
    • mani 15/09/2016
  4. Kajalsoni 15/09/2016
    • mani 15/09/2016
  5. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 15/09/2016
    • mani 16/09/2016
  6. Saviakna 15/09/2016
    • mani 16/09/2016
  7. babucm 16/09/2016
  8. mani 16/09/2016
    • babucm 16/09/2016
      • mani 16/09/2016
    • mani 16/09/2016
  9. RAJEEV GUPTA 16/09/2016
    • mani 16/09/2016

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