हिंदी दिवस पर गजल

भारत की पहचान है हिंदी
जन जन का सम्मान है हिंदी

लेकिन क्यूँ लगती बेघर ये
झेल रही अपमान है हिंदी।

अपनेपन की शीतल सरिता
प्यारी एक जुबान है हिंदी।।

दुनिया में लहराती परचम
भाषा एक महान है हिंदी।।

बहती उत्तर से दक्षिण तक
एका की पहचान है हिंदी।।

मान दिलाये दूर देश में
गीता है कुरान है हिंदी।।

रहती है बंधकर नियम में
भाषा में विज्ञान है हिंदी।।

जोश जगाती रणवीरों में
तिरंगे का मान है हिंदी।।

वीरों की गाती गाथा है
इस मिट्टी की जान है हिंदी।।
!!!
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सुरेन्द्र नाथ सिंह ‘कुशक्षत्रप’

17 Comments

  1. Shishir "Madhukar" 14/09/2016
    • सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 14/09/2016
  2. निवातियाँ डी. के. 14/09/2016
    • सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 15/09/2016
  3. babucm 14/09/2016
    • सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 15/09/2016
  4. Meena bhardwaj 14/09/2016
    • सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 15/09/2016
  5. अकिंत कुमार तिवारी 14/09/2016
    • सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 15/09/2016
  6. MANOJ KUMAR 15/09/2016
    • सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 15/09/2016
  7. MANOJ KUMAR 15/09/2016
  8. शीतलेश थुल 15/09/2016
    • सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 15/09/2016
  9. Kajalsoni 15/09/2016
    • सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 16/09/2016

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