देखा है खुद को”” “”” “”””””सविता वर्मा

तेरे सार्थक शब्दो की बूनावट में
आकाश में दिखती उपमाओ में
आती जाती हवाओ में
अक्षरो के रेशे रेशे में
फूर्सत के हर छड़ो में
उभरती हुई हर अक्स में
मध्म सुनाई देती धुनो में
कतरा कतरा तेरी निगाहो में
मैने देखा है खुद को।।।।।।।

5 Comments

  1. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 16/09/2016
  2. mani 16/09/2016
  3. निवातियाँ डी. के. 16/09/2016
  4. Savita Verma 17/09/2016

Leave a Reply