हिन्दी हुं मै

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क्युं बेइज्जत कर दी जाती
बहुत दुखी, स्तब्ध हु अपने मन
हिन्दी हुं मै हिन्द की धड़कन
रची बसी माटी मे कण कण
राष्ट्रभाषा हु मे अपने ही आगंन…

गांवों की अमराइयों में महकती
लोकगीतों की सुरीली तान में गुंजती
नवसाक्षरों का सुकोमल सहारा
जनसंचार का हुं स्पंदन
हिन्दी हु मै हिन्द की धड़कन
रची बसी माटी मे कण कण
राष्ट्रभाषा हु मे अपने ही आगंन

क्युं बेइज्जत कर दी जाती
बहुत दुखी, स्तब्ध हु अपने मन
हिन्दी हुं मै हिन्द की धड़कन
रची बसी माटी मे कण कण
राष्ट्रभाषा हु मे अपने ही आगंन…

गांवों की अमराइयों में महकती
लोकगीतों की सुरीली तान में गुंजती
नवसाक्षरों का सुकोमल सहारा
जनसंचार का हुं स्पंदन
हिन्दी हु मै हिन्द की धड़कन
रची बसी माटी मे कण कण
राष्ट्रभाषा हु मे अपने ही आगंन

मंदिरों की घंटियों, मस्जिदों की अजान
गुरुद्वारे के शब्द और चर्च की पहचान
देश के रेशे-रेशे में बुनी जीवंत जुबां
हिन्दी हु मै हिन्द की धड़कन
रची बसी माटी मे कण कण
राष्ट्रभाषा हु मे अपने ही आगंन…

 

कपिल जैन

3 Comments

  1. कुशवाह विकास ( दिनेश ) 14/09/2016
  2. Kajalsoni 14/09/2016

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