”मैं हिंदी हूँ स्वयं प्रमाणित”

नहीं चाहती अस्तित्व होने का ना खोने की चिंता है चाहते हैं जो लोग सहस्रों वही गौरवी-चहेती जनता है.आवेश ही क्या कोई मेरा कभी बांध पाया है मैं निरंतर धरा हूँ प्रवाहित इस बाढ़ में हरेक समाया है.विश्व में अस्तित्व का अपने हाँ, लौहा मैनें मनवाया है रूचि रूपी अलख जगा विद्वानों ने आज हिंदी दिवस मनाया है. हिन्द ने मुझे पाला-पोसा इसलिए गौरव से हूँ अभिमानित प्रमाण नहीं चाहती औरों से मैं हिंदी हूँ स्वयं प्रमाणितहाँ, ‘मैं हिंदी हूँ स्वयं प्रमाणित’.लेखकः-कमल वीर सिंह उर्फ़ कमल “बिजनौरी”

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17 Comments

  1. Shishir "Madhukar" 08/06/2017
    • kamal "bijnauri" 08/06/2017
  2. arun kumar jha 08/06/2017
    • kamal "bijnauri" 08/06/2017
  3. कमल "बिजनौरी" 08/06/2017
  4. डी. के. निवातिया 08/06/2017
    • कमल "बिजनौरी" 10/06/2017
  5. Kajalsoni 08/06/2017
    • कमल "बिजनौरी" 10/06/2017
  6. madhu tiwari 08/06/2017
    • कमल "बिजनौरी" 10/06/2017
  7. bindeshwar prasad sharma 09/06/2017
    • कमल "बिजनौरी" 10/06/2017
  8. babucm 09/06/2017
    • कमल "बिजनौरी" 10/06/2017
    • कमल "बिजनौरी" 10/06/2017

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