रुसवाई – शिशिर मधुकर

सभी गुण हैं तुम्हारे पास पर तुम मेरी ना बन पाई
मेरे जीवन में तब ही तो हरदम रहती हैं ये तन्हाई
तुमने तो भुला दी हैं सब कसमें अपने मिलाप की
पीड सहकर भी मैंने की ना तेरी कोई भी रुसवाई

शिशिर मधुकर

8 Comments

  1. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 11/09/2016
  2. Shishir "Madhukar" 11/09/2016
  3. babucm 12/09/2016
    • Shishir "Madhukar" 12/09/2016
  4. Kajalsoni 12/09/2016
  5. Shishir "Madhukar" 12/09/2016
  6. शीतलेश थुल 12/09/2016
    • Shishir "Madhukar" 12/09/2016

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