पिता महान होते है

चिरैया चहकती
फूल हँसते
पत्ते खिलते
सूरज निकलता
बच्चे जगते
आगंन मे खेलते
मुट्ठी में दिन
आंखों में सपने होते
पिता जब साथ होते

चिड़ियाँ चीखती
फूल चिढ़ाते
पत्ते मुरझाते
खेल-खिलौने ना रहते
सपने धूप में झुलसते
बच्चे
मुँह-अंधेरे काम पर निकलते
सूरज पीठ पे ढोते
शाम ढले
थक कर सोते हैं
पिता जब दूर होते

तितलियाँ
उंगलियों में ठिठकती
मेंढक
हाथों में ठहरते
मछलियाँ
पैरों तले गुदगुदाती
भौंरे
कानों में सरगोशी करते
उम्र के अनोखे जोश होते
हाथ डैने
पैर खरगोश होते
पिता जब साथ होते

रंग तेजी से बदलते
तितलियाँ, मेंढक,
मछलियाँ, भौंरे, चिरैया
सब होते
लेकिन इस मोड़ पर
आते आते
बचपने में कहीं खो जाते
जिंदगी मुट्ठी से रेत की तरह
फिसलती
पिता जब नहीं रहते
उनकी बहुत याद आती

एक फर्क यह भी होता है
पिता के होने और न होने में
कि पिता जब साथ होते हैं
समझ में नहीं आते
जब नहीं होते
महान होते है…..

कपिल जैन

8 Comments

  1. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 11/09/2016
    • कपिल जैन 11/09/2016
  2. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 11/09/2016
    • कपिल जैन 11/09/2016
  3. Kajalsoni 12/09/2016
    • कपिल जैन 12/09/2016
  4. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 12/09/2016
  5. कपिल जैन 12/09/2016

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