“खामोशी-2”

तुम्हारी खामोशी बिन मौसम की बरसात

जब मन किया बस यूं ही पसर जाती है

हवाओं का दवाब कुछ कम सा है

निर्वात का आभास कहता है

आँधी या तूफान आने वाला है

तुम्हारी खामोशी भी कुछ-कुछ वैसी ही है

बताओ ना कौन सा गुल खिलाने वाले हो ?

8 Comments

  1. निवातियाँ डी. के. 10/09/2016
    • Meena bhardwaj 10/09/2016
  2. Shishir "Madhukar" 10/09/2016
    • Meena bhardwaj 10/09/2016
  3. mani 10/09/2016
    • Meena bhardwaj 10/09/2016
  4. C.m sharma(babbu) 10/09/2016
  5. Meena bhardwaj 10/09/2016

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