तेरे सपने – शिशिर मधुकर

तेरे सपने मेरी आँखो में जब भी आते हैं
मेरे लब लाल हो मस्ती के गीत गाते हैं.

बाँहों में बाँहें लिए इतने वादे जो करें
भूलें ना कोई भी हम रोज़ ही दोहराते हैं

लाखों की भीड़ में गर कोई अपना सा लगे
जान लो आज के ना जन्मों के ये नाते हैं

कोई भी बात मन की जब उसे कहनी ना पड़े
ऐसी सूरत में दोनों तन एक जाँ हो जाते हैं

छोड़ कर जब से वो सरे राह में गए मधुकर
उनकी यादों के साये हर पल हमें सताते हैं

शिशिर मधुकर

14 Comments

  1. Dr Swati Gupta 10/09/2016
    • Shishir "Madhukar" 10/09/2016
  2. kiran kapur gulati 10/09/2016
    • Shishir "Madhukar" 10/09/2016
    • Shishir "Madhukar" 10/09/2016
  3. निवातियाँ डी. के. 10/09/2016
    • Shishir "Madhukar" 10/09/2016
  4. C.m sharma(babbu) 10/09/2016
    • Shishir "Madhukar" 10/09/2016
      • C.m sharma(babbu) 11/09/2016
      • C.m sharma(babbu) 11/09/2016
  5. Kajalsoni 12/09/2016
    • Shishir "Madhukar" 12/09/2016

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