माना मेरी ज़िन्दगी…सी.एम्.शर्मा (बब्बू)

माना मेरी ज़िन्दगी मुठी ख़ाक भर ही तो है…..
हर एक शै यहाँ भी फिर राख-ज़र ही तो है….
माना मेरी ज़िन्दगी…….

हर शख्स ज़माने में बदल सा रहा है क्यूँकर….
जिस्म-जहाँ सभी किराए का घर ही तो है….
माना मेरी ज़िन्दगी…….

देता रहा मैं तुमको सदा रुक के बार बार…..
के ज़िन्दगी मेहमान मेरी रात भर ही तो है…..
माना मेरी ज़िन्दगी…….

दिल के करीब है बहुत वो दर्द का जहां….
कहता था दर्द मेरा एक आँख भर ही तो है…..
माना मेरी ज़िन्दगी…….

“बब्बू” भी लुट रहा था कुछ इस उम्मीद से….
ज़िल्लत भी जैसे सिर्फ एक बात भर ही तो है…
माना मेरी ज़िन्दगी…….
\
/सी.एम्.शर्मा (बब्बू)

20 Comments

  1. Shishir "Madhukar" 09/09/2016
    • C.m sharma(babbu) 10/09/2016
    • C.m sharma(babbu) 10/09/2016
  2. Meena bhardwaj 09/09/2016
    • C.m sharma(babbu) 10/09/2016
  3. निवातियाँ डी. के. 09/09/2016
    • C.m sharma(babbu) 10/09/2016
    • C.m sharma(babbu) 10/09/2016
  4. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 10/09/2016
    • C.m sharma(babbu) 10/09/2016
  5. Dr Swati Gupta 10/09/2016
    • C.m sharma(babbu) 10/09/2016
  6. mani 10/09/2016
    • C.m sharma(babbu) 10/09/2016
  7. Meena bhardwaj 10/09/2016
    • C.m sharma(babbu) 10/09/2016
  8. Kajalsoni 12/09/2016
    • babucm 12/09/2016

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