बेकार

sheetbekar
दुनिया छिपाती है अपने सारे गम, रात के अँधेरे में,
मेरे गम ऐसे के, अँधेरे में चमकने लगते है,
मरहम लगाती ठंडी बयार औरो के जख्मो में ,
यहाँ तो झोंके ही जख्मो को नासूर बनाने लगते है,
रातों की चांदनी, औरो को मीठी नींद सुलाती है,
फिर क्यूँ इसकी रौशनी, मेरी आँखों में चमकती है,
बन गये है आजकल ऐसे के, लोग भी मुंह फेरते है,
हो गये हम भी उनमे से एक, जो रात में जाग, दिन में सोया करते है,
आने जाने वाले अक्सर, हमें बेकार कहा करते है..
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शीतलेश थुल !!

10 Comments

  1. C.m sharma(babbu) 08/09/2016
    • शीतलेश थुल 10/09/2016
  2. निवातियाँ डी. के. 08/09/2016
    • शीतलेश थुल 10/09/2016
  3. Shishir "Madhukar" 08/09/2016
    • शीतलेश थुल 10/09/2016
  4. vijay kumar Singh 08/09/2016
    • शीतलेश थुल 10/09/2016
  5. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 09/09/2016
    • शीतलेश थुल 10/09/2016

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