बेइमान बहुत है—–(डी.के. निवातियाँ )

लोग शहर के अनजान,एक दूजे से हैरान बहुत है !देखकर हालात इंसानियत के, दिल परेशान बहुत है !!बिकता है देखो मजहब आज आतंक के इस बाजार में !मगर धर्म के ठेकेदारों की आज भी शान बहुत है !!कही मिले जो तुमको थोड़ा सा ईमान खरीद लाना !सुना है अब दिल के कारोबार में बेईमान बहुत है !!कायदा कायम रहे इसकी राह नही इतनी आसान !रहना तैयार कुर्बानियों के अभी इम्तिहान बहुत है !!लाख तूफ़ान ऐ गर्दिश आये हो मगर वो झुकता नही !लेकिन सच्चाई पर खुदा आज भी मेहरबान बहुत है !!कोई अच्छा कहे या बुरा, तुम करना सबको तस्लीम ।कौन है अर्जमंद आज “धर्म” से, कलयुग में शैतान बहुत है ।।।।।—डी.के. निवातियाँ —(अर्जमन्द= महान)

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12 Comments

  1. Shishir "Madhukar" 03/02/2017
    • डी. के. निवातिया 06/02/2017
  2. Madhu tiwari 03/02/2017
    • डी. के. निवातिया 06/02/2017
  3. Meena Bhardwaj 04/02/2017
    • डी. के. निवातिया 06/02/2017
  4. babucm 04/02/2017
    • डी. के. निवातिया 06/02/2017
    • डी. के. निवातिया 06/02/2017
  5. Kajalsoni 05/02/2017
    • डी. के. निवातिया 06/02/2017

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